असर लॉकडाउन का:-विजय

जिस राह चला मैं वर्षो
आज अनजाना सा लगा
देखा हर दिन जो चेहरा
अलग उसका पहचान लगा

मिलने को हाथ जो थे बढ़ते
हाथ वो आज बढ़ न सका
आमंत्रण दे जो दिखने पर
दिखने पर चिंता में पड़ने लगा

रौनक होती थी जो गलियां
आज गली वो श्मशान लगा
देखता व्यक्ति किवाड़-ओट से
आज वो जिंदा लाश लगा

मन्दिर,मस्जिद, चर्च,गुरुद्वारा
जगह-जगह ताला है लगा
गाड़ी,बंगला,सोना की न जरूरत
जरूरत रोटी,कपड़ा,मकान लगा

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 06/07/2020
    • vijaykr811 vijaykr811 13/07/2020
  2. deveshdixit deveshdixit 09/07/2020
    • vijaykr811 vijaykr811 13/07/2020

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