क्या मैं और क्या अहम By Poet Alok Upadhyay

कूदरत ने बनाया सबकोंसबको कूदरत में मिल जाना हैं ,क्या मैं और क्या अहमसब एक से हैं ये बताना हैं ।नफ़रत की धारा में हमनेंअपना चैन अमन सब बहां दिया ,आई मदद की बारी अपनीमैं कहताउसनें मूझे कूछ कहां दिया ,ना सुख को कोई खरीद सकाना दुख का कोई ठिकाना हैं !क्या मैं और क्या अहमसब एक से हैं ये बताना हैं ।वक्त कभी था अच्छा मेराउस वक्त पे बड़ा इतराऊ मै ,नीचा दिखाया था कल सबकोंआज क्या मूहँ लेके जाऊं मैं ,मेहनत अगर सफलता की पूंजी हैंव्यवहार बड़ा खजाना हैं ,क्या मैं और क्या अहमसब एक से हैं ये बताना हैं ।

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