मेहरबानी

मंच को सादर नमन 🙏दिनांक: 20.05.2020वार : बुधवारविषय : मेहरबानीआज बाग के फूल जो कभी काँटे थे विरह के जंगल से हम दोनों ने बाँटे थेअपनी यादों में जाने कब से खिला रहा है मेहरबानी उसकी जो मुझसे निभा रहा है जीवन में भटकाने वालेजाने कितने मौसम आऐकितने मधुमीत बने जाने कितने गले लगाऐरखकर हाथ हृदय पर वो मुस्करारहा है मेहरबानी उसकी जो मुझसे निभा रहा है अपने अन्तर्मन में ना जाने लेकर के सभी ख्वाब पुराने फिर ड्योढ़ी पर मेरी, दीप जला रहा है मेहरबानी उसकी जो मुझसे निभा रहा हैराकेश कुमार महेंद्रगढ़ हरियाणा

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

Leave a Reply