# औरंगाबाद हादसा

की करीब थी तू तो पहले ही बताया होता ,इतने मिलो तक मैं चल के न आया होता lतब तो धुप ने भी  अपना रंग जमाया न होताऔर खली झोली में डाल कर ,  घर पहुँचने की वो की वो उम्मीद में लाया न होतावही रहता और सबको ख्वाब दिखाया न होताकाश काश तूने पहले कुछ बताया होता अँधेरा था बहुत नहीं तो  समझाया न होता ,सोता नहीं और चलता रहता तो तेरे छलावे में न आया होताभूक प्यास की चिंता नहीं ,पर बनते कई पबचै थी , करूँगा कभी अपने आपसे कह के आंखो मे छुपाई थिसकह  ही देती आने से पहले , बच्चो को तो बचाया होताकाश काश तूने पहले कुछ बताया होता 3.पीछे मूड कर भी न देखा  की साँसे थम गयी या चल रही हेमिल जाती कोई सवारी मुझे भी , हवाई नहीं सड़क से ही आया होताकाश मैं सबको इस जंगल में न लाया होताकाश काश तूने थोड़ा तो रहम दिखाया होता२ वक़्त का इंतज़ाम नहीं , ४ रोटी बचा के लाया थासोचा था खिलाऊंगा इन्हे सुबह ये कह के सुलाया थाअब बंद कर ढोंग अपने अफ़सोस का ,यूँही तो नहीं त्रिकाल पड़ी तू ,जो रस्ते में मुझे पाया था ,मान भी ये अब की तूने तो सीसोचा समझा प्लान बनाया था यहाँ तक तो आ ही गयी थी , छाल देती कोस और  मेरे  साथख़ुशी मेरी देख कर , तू भी ज़रूर मुस्कराई ,होती  जयादा तो कुछ नहीं  बस तसली कर लेता की सब ठीक हे वहाअगर थोड़ा रुक के तुम आयी होती इंतज़ार भी न कर सकी मेरे जागने काक्या खौफ था तुझे मेरी आँखों में झाकने काखुली आंखो से तो तुझे गले भी लगाया होताअँधेरे में तो  गुनाह होते हेयही सोच कर एक बार तो अपने ज़मीर को जगाया होतावजूद नहीं हमारा कोई , हम रहे या न रहेगुफ्तगू  ही कर लेती मुझसे , तो कहता ज़रूर किसी ने तुझे गलत पता बताया होगा आवाज आ रही थी सिसकियो की काफी देर तक , मुझे नहीं किसी  और को बुलाया होतासब सुन रहा था , पर अगर वह होता तो ज़रूर किसी न किसी को तो बचाया होताएक माँ बैठी हे इंतज़ार में , की शाम ढल चुकी हे शायद बेटा कुछ पास तक तो पहुँच पाया होगाथा सामान कुछ घर का , पर अब तो फिर से सिर्फ चूल्हे पर पानी ही चढ़ाया होगाऔर अब फिर से मेरी माँ ने दिया नहीं जलाया होगा। …

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