वो पत्थर तोड़ने वाले

वो पत्थर तोड़ने वालेवो जो चल रहे हैं निरन्तर , पांवो में लिए छाले ,वो मेरे देश के कामगार , वो पत्थर तोड़ने वाले .इन्होने ही रचे थे ये खूबसूरत से शहरये ऊंची अट्टालिकाएं , ये पुळ , ये नहरचमचमाती सड़कें , बाजार , बाग़ , व उद्यान ,वो ‘नींव के पत्थर ‘ वो कंगूरे सजाने वाले .विपदा आई , अनहोनी बड़ी भारीराजा भी हैरान , दुनिआ ही हारीआसमान में उड़ने वालों की पहले बारी आईपटरी पर चलने वाली रेल देर से चल पाईतब तक निकल चुके थे , सदा जूझने वालेवो ‘नींव के पत्थर ‘वो कंगूरे सजाने वाले .साथ चल रहे हैं नन्हे नन्हे पाँव भीकुछ रास्ते में सो गए , कुछ पहुंचे गाँव भीरास्ता है लम्बा , कुछ भी नहीं सहारासर पे जलता सूरज , सदा झेलने वालेवो ‘नींव के पत्थर ‘, वो कंगूरे सजाने वाले .ओ बादल तेज चलो , तुम्हीं थोड़ी छाया देनाओ हवा जरा तेज बहो , थकन सबकी मिटा देनाओ दरख्तों ,दृढ़ता के प्रतीक ,तुम उनको हौसला देनाजुझारू बहुत हैं , मेहनती भी , अपने से ज्यादा वजन ढ़ोने वालेवो ‘नींव के पत्थर ‘वो कंगूरे सजाने वाले .वो मेरे देश के कामगार , वो पत्थर तोड़ने वाले .-डॉ दीपिका शर्मा

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  1. Shishir "Madhukar" 16/05/2020

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