माँ – डी के निवातिया

।। माँ ।।

मोतियों सा भरा समंदर,लहरों सी उतार-चढ़ाव, माँ,

उम्मीदों से भरा शहर जैसे,कोई ठहरी झील सी गाँव, माँ,

शुभकामनाओं की लड़ी,आशीषों की बड़ी छाँव, माँ,

सूरज माथे की बिंदियाँ,चाँद तेरे चेहरे का ताव, माँ,

भोर में उषा की लालिमा,गोधूलि में उड़ता ठहराव, माँ,

सावन में तेरा पल्लू छाता,सर्द ऋतू में बने अलाव, माँ

बाबुल आंगन की नाजुक परीमाँ की बगियां का पुष्पलाव, माँ,

दुःख सहती, हँसती, बे-ग़म,सुखों का बहाती दरियाव, माँ,

पुत्र, पति, परिवार की पालक,बिटियाँ संग रखे सखीभाव, माँ,

देना ही देना, कर्म आजीवन,तेरे आँचल में नही अभाव, माँ

मंज़िल की पथ प्रदर्शक,जीत का बड़ा उमहाव, माँ,

वात्सल्य करुणा की मूरत,प्रेम का अद्भुत अमिट स्राव, माँ,

आजीवन काम आया,एक मात्र तेरा ही सुझाव, माँ,

मरण के जग में पथ अनेक,जन्म का एक ही पर्याप्लाव, माँ ।

मैं, तेरे आँचल का फूल,तुम हो, मेरे जीवन का पड़ाव माँ।।

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स्वरचित – डी के निवातिया

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10 Comments

  1. rakesh kumar rakesh kumar 14/05/2020
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 15/05/2020
  2. अंजली यादव Anjali Yadav 15/05/2020
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 16/05/2020
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/05/2020
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 16/05/2020
  4. Ram Gopal Sankhla Ram Gopal Sankhla 19/05/2020
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 19/05/2020
  5. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 08/06/2020
  6. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 08/06/2020

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