कर्ण-अर्जुन:-विजय

आमने-सामने थे दो भाईधर्म-अधर्म की थी लड़ाईपास एक का था गांडीव बाणों की बौछार चलाईधरती से स्वर्ग लोक तकदी धनुष की टंकार सुनाईदो वीरो के युद्ध देखकरभूमि कुरुक्षेत्र की थी थर्राईपार्थ-सारथी स्वयं कृष्ण थेकर्ण-रथ हाँके माँ के भाईलहू बहाएं जा रहे थे दोनोजिनकी थी एक ही माईंथे दोनो सर्वश्रेष्ठ धनुर्धरमृत्यु-भय दोनो पर छाईदेख नारायण चकित हो रहेकरते कर्ण की खूब बड़ाईधर्म तले अर्जुन था बैठाधर्म ने अर्जुन की जान बचाईमित्र-धर्म का पालन करतेदानवीर ने अपनी प्राण गवाईं

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2 Comments

  1. rakesh kumar rakesh kumar 14/05/2020
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 15/05/2020

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