हाँ वो मेरी माँ है

“हाँ वो मेरी माँ है”याद मुझे आज भी यह बिल्कुल साफ-साफ है;जुबाँ पर पहला नाम जो मेरे आया है, हाँ वो मेरी माँ है।भूख-प्यास और ज़िद को मेरी पलक झपकते ही;जिसने हर वक़्त मिटाया है, हाँ वो मेरी माँ है।बचपन से लेकर अब तक ग़लतियों को मेरी;जिसने नज़र-अंदाज़ बनाया है,हाँ वो मेरी माँ है।अहसान एक या दो हो तो गिनाए भी कोई;क़तरा-क़तरा मेरा जिसका कर्ज़दार हो गया है, हाँ वो मेरी माँ है।अज़्मतों पर माँ के क्या लिक्खें कोई नज़्म ‘अब्दुल’;पढ़ना और लिखना जिसने सिखाया है, हाँ वो मेरी माँ है।✍️अब्दुल्लाह क़ुरैशी

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