भारत का भाल ऊंचा था ऊंचा ही रहेगा।

  1. ­भारत का भाल ऊंचा था ऊंचा ही रहेगा।हमने है सींचा प्यार से बढ़ता ही रहेगा।।हम शेर हैं गुफा में कभी रह नहीं सकते।छेड़ोगे अगर तो समझ लो बच नहीं सकते।।सदियों से हमने देखा है आंखों से यह मंजर।हम है अहिंसावादी उठाते नहीं खंजर।।आग से मत खेलो वरना जलना पड़ेगा।भारत का भाल ऊंचा था ऊंचा ही रहेगा।।ईर्ष्या बैर छोड़ दो ये ठीक नहीं है।भारत का एक टुकड़ा हो यह सीख नहीं है।।नफरत का बीज बोना कभी ठीक नहीं है।कांटो में उलझना कोई तारीफ नहीं है।।सरहद के इधर आओगे तो मरना ही पड़ेगा।भारत का भाल ऊंचा था ऊंचा ही रहेगा।।आतंकवादियों की नर्सरी ना चलाओ।दुश्मन जो सारे देश के उनको ना बढ़ाओ।।इंसान हो इंसानियत का पाठ पढ़ाओ।टुकड़ों पर जीने वालों को ना घर में बसाओ।।उजड़ा वतन तो बैठ कर रोना ही पड़ेगा।भारत का भाल ऊंचा था ऊंचा ही रहेगा।।फूंकार भरने वालों का सर तोड़ना होगा।आये हैं जहां से वहीं मुख मोड़ना होगा।।भूचाल आ ना जाए घर अपना बचाओ।हर नागरिक का खून बहने से बचाओ।।कुर्सी की वरासत नहीं पछताना पढ़ेगा।भारत का भाल ऊंचा था ऊंचा ही रहेगा।।बापू भगत आजाद का यह देश है मेरा।चमत्कारियों की तपो स्थली वन बाग घनेरा।।कलरव करे झरना फिरे मन मोह लेते हैं।वन वाटिका पुष्पों की महक मोह लेते हैं।।वर वादियों का दौर बंद करना पड़ेगा।भारत का भाल ऊंचा था ऊंचा ही रहेगा।।

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