कविता_ “कि कोशिश बड़ी चीज है”

कब तक किस्मत को कोसोगे,मीन-मेख दूसरों में खोजोगें,क़दम बढ़ा जो, मिलना फिर लाज़िम है;कि कोशिश बड़ी चीज है।दूरी और नफ़रत छू मंतर हो जायेगी,ग़ैर-पराये की रस्में भस्म हो जायेगी,मान लो फिर, सब अपना ही अपना है;कि कोशिश बड़ी चीज है।_©✍️अब्दुल्लाह क़ुरैशी

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