कविता प्रकाशनार्थ

शीर्षकदुनिया बदल गईधरी रह गई अकड़ हमारीछिपने को मजबूर हुएकोरोना की महामारी सेदुनिया से हम दूर हुए।गलियां सूनी सूने मोहल्लेचौराहे सड़कें सब सूनीसन्नाटा पसरा है घरों मेंजैसे दुनिया उजड़ गई।शीतल मंद पवन के झोंकेचिड़ियों के मधुरम कलरवस्पष्ट सुनाई दे जाते हैंमानो दुनिया बदल गई।समय नहीं है जो कहते थेपरिवार से दूर रहते थेदूरी उनको रास न आईसबने घर की दौड़ लगाई।संकट काल में एक हुए सबकरने लड़ने की तैयारीमहाविनाश पर विजयी बननेघर में रहने की है ठानी।निलेश जोशी” विनायका”बाली ,पाली (राजस्थान)

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