एक कदम घर की ओर  ———————-

 एक कदम घर की ओर
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कदम बढ़ा रहा था , जाने क्यूं ओ घर की ओर ।
था पता उसे, नहीं है कुछ खाने को वहां, फिर भी घर की ओर ।।
एक उम्मीद भरी कदमे , चलता रहा ओ घर की ओर ।
कदम बढ़ा रहा था, जाने क्यूं ओ घर की ओर।।
पता नहीं दूरियां कितनी , हा सच में पता नहीं दूरियां कितनी,
 निकल पड़ा ओ घर की ओर ….
कदम बढ़ा रहा था ओ , जाने क्यूं ओ घर की ओर।।
रख कर कंधो पर, जिम्मेदारी भरी बोरियां कदम बढ़ा रहा था ….
दूरियों की गिनतियां दिन में बता  कर चल दिए ओ घर की ओर ।
कदम बढ़ा रहा था , जाने क्यूं ओ घर की ओर
एक छोटी सी प्रयास
       साहब

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