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हे मन ! तू अधीर न बन.                       यह समय का हो रहा परिवर्तन,.              न रहा ख़ुशी का बोलबाला सदा.             न  ही रहेगा गम,.                                   हे मन ! तू अधीर न बन |मन के भय को दूर भागना है,अवांछित बीमारी को डराना हैसंक्रामकता पर विजयी होना है,सुरक्षित वातावरण बनाना है | अपनों क लिए अपनों के पास, यही है सुरक्षा का एहसास, कठिन समय यू ही निकल जाएगा सुख का सवेरा धूप खिलाएगा, हे मन ! तू अधीर न बन |आवश्यकता है एकजुटता की,चिंतन की,सामंजस्य कीजाती, वर्ग,धर्म से ऊपर उठ जाना हैवैश्विक महामारी को दूर भगाना हैमानव हित को सर्वोपरि बनाना है |हे मन ! तू अधीर न बन,हे मन ! तू अधीर न बन |पूजा शर्मा

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