कोरोना ग़ज़ल

विश्व अब चिंतित बहुत है आई संकट की घड़ी हैकष्ट भय चर्चित बहुत है आईं संकट की घड़ी हैयह महामारी बनी दुस्साध्य कोविड है चुनौतीसंक्रमण गर्हित बहुत है आई संकट की घड़ी हैदर्द होता प्यार ‌का तो दिल उसे चुपचाप सहताघाव यह घर्षित बहुत है आईं संकट की घड़ी हैतू मुझे मत छू न तुझको मैं छुऊं रख फासला कुछखुद छुअन शंकित बहुत है आईं संकट की घड़ी हैआप अपने आपको सिरमौर‌ कहते व्यक्ति ‌का‌ भीमान मन मर्दित बहुत है आई संकट की घड़ी हैहै जरूरत आपसी सहयोग की सौहार्द की भीमन दुखी दग्धित बहुत है आई संकट ‌की घड़ी हैक्या हुआ यह क्यों हुआ हल किस तरह निकले ‘प्रसून’हर दिशा विस्मित बहुत है आई संकट की घड़ी है रमेश प्रसूनबुलंदशहर 203001(उ प्र)मोबाइल 9259269007

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