मैं मनुज हूँ

मत कर विश्वास रजत मुझ पर कहीं,कंचन मिला तो तुझे छोड़ने का ग़म नहीं |तुम फ़ैलाओ चांदनी, मैं चाँद में दाग देखने बैठा हूँ,मैं मनुज हूँ, दिल में तमस का कहर लिए बैठा हूँ ||चलो मेरी पर्णकुटी तो खुद लूटी हुई,धर्म के नाम पर दुनिया तेरी रूठी हुई |गुलशन में फूल की बात न करकर्दम में कमल वीरान को बैठा हूँ,मैं मनुज हूँ, दिल में तमस का कहर लिए बैठा हूँ ||तुम करों यशोगान की बातें, में उसे काटने को कहता हूँ,छद्म आवरण पहने वैभव का गुणगान करने बैठा हूँ |न करों उपमा किसी के साथ उसपर कलंक लगाते रहता हूँ,मैं मनुज हूँ, दिल में तमस का कहर लिए बैठा हूँ ||मेरा खुद का जीवन तो अनुर्वर किया बैठा हूँ,और तेरे जीवन का मंदार रोज सहता हूँ |तू कर फसाद हमेशा साथ खड़े रहता हूँ,मैं मनुज हूँ, दिल में तमस का कहर लिए बैठा हूँ ||📝 अभिषेक चारण (लूणावास ) 

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