फिर तेरी याद

गर्म हवा फिर आज मुझको सहला रही हैतेरी ही गर्म साँसों का तसव्वुर करा रही हैआज फिर तेरी याद आ रही है।गीत वही पुराना फिर कोई गा रहा हैकानों में जैसे खारा शहद टपका रहा हैबड़ी दूर से जैसे कोई सदा आ रही हैआज फिर तेरी याद आ रही है।कागज के कुछ पन्ने सामने पड़े हैइनमे जैसे किसी ने फँसाने गढ़े हैंसूखे हुए फूलों की खुशबू आ रही हैआज फिर तेरी याद आ रही है।हसीन सी ये शाम है बहार इसका नाम हैमदहोश सी खामोश सी किसी तरफबढ़ती ही जा रही ढलती ही जा रही हैआज फिर तेरी याद आ रही है।दिल मे अजब सी उलझन सी हैसीने में भी जकड़न सी हैधड़कन भी चुपचाप सी कुछ गुनगुना रही हैआज फिर तेरी याद आ रही है।आज फिर तेरी याद आ रही है। ………………………..अमित ‘केवल’

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