एहतियात – शिशिर मधुकर

अब दूर तुमसे रहूं मैं ये ही सही बात होगी अगले जन्म में ही देखो अपनी मुलाक़ात होगी गुजरा है बारिश का मौसम नभ पे भी बादल नहीं हैं सावन में अगले ही अब तो लगता है बरसात होगी खुद ही चले आओगे तुम अपने गले से लगाने ऐसा अगर हो गया तो असली करामात होगी सच्ची मुहब्बत मिली है हर एक युग में जतन सेकुछ चीज ये कीमती है हरगिज ना खैरात होगीगलती हुईं खूब हमसे अब ना कोई रास्ता है फिर से मिलेंगे तो मधुकर अच्छे से एहतियात होगीशिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. Devesh Dixit 12/04/2020
    • Shishir "Madhukar" 15/04/2020
  2. shrija kumari 15/04/2020
    • Shishir "Madhukar" 15/04/2020

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