महका कुसुम – शिशिर मधुकर

देखो तुम्हारी वजह से कुछ तो मुझे भी मिला है बंजर सी भूमि में दिल की महका कुसुम एक खिला है ये जिंदगी का सफर है कटता नहीं है अकेले नए दोस्तों से मिलन भी जीवन का एक सिलसिला है बढ़ना है जीवन में आगे कब तक उदासी सहेंगे भूलो किसी से अगर अब कोई पुराना गिला है आबाद करना जरूरी देखो है अब इस चमन को सूखे वनों में कभी भी गाती नहीं कोकिला है नुक्सान होते रहे हैं नुक्सान होते रहेंगे मधुकर मगर ये भी सच है रुकता नहीं काफिला है शिशिर मधुकर

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2 Comments

  1. Devesh Dixit 12/04/2020
    • Shishir "Madhukar" 16/04/2020

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