दिया जला के – शिशिर मधुकर

तुमको पुकारते हैं मन में दिया जला केमुझ को बचा लो देखो नेहा का रस पिला केयूं तो हसीं हैं लाखों तुम सा कोई ना देखालगते हो खूबसूरत तुम तो मुझे बला केअब दूर तुम खड़े हो अनजान भी बने होकरता कोई ना ऐसे हर सांस को मिला केमजबूरियां अगर है हरदम तुम्हारे संग मेंदे दो निगार अपना मुझको कोई ढला केशिकवे शिकायतें सब आ कर मुझे बता दोमधुकर जवाब देगा तेरे हर इक गिला के शिशिर मधुकर

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2 Comments

  1. deveshdixit Devesh Dixit 12/04/2020
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/04/2020

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