विकास – शिशिर मधुकर

ये जिंदगी के मोड़ सभी आते ना रास हैं कहते नहीं हैं वो मगर रहते उदास हैं मन में ख़ुशी रहे अगर तब देख लेंना तुम कैसे भी पहन लो सदा जंचते लिबास हैं एक दूसरे का मान हैं जो इस सफर में सुन हरदम फकत वो बांटते सबको मिठास हैं जो गैर से बने रहें रह के भी साथ में ऐसे घरों में ना हुआ करते उल्लास हैं रिश्तों का मान ना रहा रुपयों के सब मुरीद इंसा को मधुकर तोड़ते नकली विकास हैं शिशिर मधुकर

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