सयाने – शिशिर मधुकर

देखो तनहा जिंदगी का मेला तो वीरान होगा कर लो मुहब्बत किसी से जीना भी आसान होगा मुहब्बत के बिन तो गरीबी हर पल रहेगी जहन में मिलेगा जिसे प्यार सच्चा वो ही तो सुलतान होगा गैरों को अपना समझ के अपनों का दिल जो दुखाए उसको तो सारा जमाना कहता ही नादान होगा कोई हार के भी सुखी है तुम जीत कर भी दुखी हो अपनों को नीचा दिखा के अपना ही नुकसान होगाबनते हैं जो बस सयाने रिश्तों की दुनिया में मधुकर एक दिन उन्हीं के घरों में सहमा सा शमशान होगा शिशिर मधुकर

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