चिराग

उम्मीदों को खुद में समेटे रहते हर चिरागसदियों से इसके बल आगे बढ़े लोग बागपास फटकेगा ना अंधेरा ये कह रहे चिरागलौ इसकी देख रोशन गदगद हैं लोग बागतम कितना भी गहन हो पल भर में ही छंटेगाबिखरा अपनी रश्मियों को यह कह रहे चिरागयुग बदले पर हमने कभी त्यागा नहीं निज धर्म जग को उजाला रहे बांटते जलाकर अपना मर्मनव विज्ञान की चकाचौंध में मुझे भूल गया इंसानपर मेरी फितरत है समझो उजियारे का देना दानथ

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