सूखे पत्ते………………………देवेश दीक्षित

सूखे पत्ते गिरे पेड़ सेहरे पत्ते लहराएडालियाँ भी झूमे ऐसेजैसे तिरंगा दिए फहराए झर – झर करते पत्ते गिरतेमंद – मंद मुसकाएडाली से छूटे ऐसेजैसे पंछी पिंजरे से उड़ जाए फूटी तब नई कोपलेंनए पत्ते इतराएबड़े हुए तो चोंके ऐसेजैसे मृत्यु से घबराए बुजुर्गों को अपने देख केनैनों मैं अश्रु भर लाएटूटे जो पेड़ से ऐसेजैसे जीवन दिये बिताए पत्ते तो पत्ते हैंकैसे इन्हें बचाएँजब मनुष्य ही आपस में बिगड़े ऐसेजैसे वे ही सृष्टि चलाएं प्रेम भाव से दूर हैं भागेकैसे इन्हें समझाएँअपने को ही ज्ञानी समझें ऐसेजैसे ज्ञान गीता का भर लाएँ   चले न किसी की अपने आगेफुले न घमंड से समाएचाकू – छुरी निकाले ऐसेजैसे गाजर – मुली टकराए इस स्थिति को देख केईश्वर भी है घबराएलीला प्रभु रचे है ऐसेजैसे जीवन अभी निपटाए पृथ्वी बड़ी खौफ सेमृत्यु को दर्शाएईश्वर को निहारे ऐसेजैसे चकोर चाँद को देख इतराए प्रभु अपने ज्ञान सेजीवन लेना बचाएबालक हैं सभी आपके ऐसेजैसे आँगन को पुष्प महकाए…………………………………………………………………………………..देवेश दीक्षित7982437710

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2 Comments

  1. vijaykr811 vijaykr811 07/04/2020
    • deveshdixit Devesh Dixit 08/04/2020

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