बात बात में

बात बात में मजहब की वो ढाल उठाते रहते हैं.जब देखो वो नियम कानूनों की बाट लगाते रहते हैं.भेजा उनका सड़ा दिया राजनीति की चालों ने. इसीलिए वे आगे रहते सभी तरह के बवालों में.ज्यादातर तो उलझे हुए जाहिलियत के दुष्चक्र में.आसानी से फंस जाते वे विदेशियों के कुचक्र में. मुख्यधारा के साथ बहें वो करना होगा हमें जतन. तभी वतन में कायम होगा शांति और चैन अमन..

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