घुनाक्षर न्याय

आज घुनाक्षर न्याय से बहुत व्यथित हैं लोगपर पीड़़ा को नहीं समझते कुर्सी पर बैठे लोगपुरखों ने जनहित खातिर लोकतंत्र अपनायाकहां पता था उन्हें के वारिस दिखलाएंगे मायाकुर्सी ऊंची मिली जिसे वो निज हित को अवराधेऐसे में फिर कौन भला क्यों निर्बल के हित साधेगहरी होती जा रही है आर्थिक विषमता की खाईप्रश्नों के घेरे में सभी नीतियां जो सरकारों ने बनाईंपैमाने सब ऊटपटांग जो तंत्र में हैं अपनाए जातेसरकारी धन का बड़ा भाग ऊंची कुर्सी वाले पातेआजादी के बाद से अब तक जारी है मनमानीबहुतों को रोटी का टोटा. कुछ के भवन आसमानीनीति नियंता घिरे हुए हैं चापलूसों के शिकंजे मेंतभी मुल्क की जनता फंसी समस्याओं के पंजे में

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