#दर्दे नयन दिहाड़ी मजदूर

( दिहाड़ी मजदूरों के नैनो की नमी आंखों के आंसू ) *कुछ नयन ऐसे भी जो सवाल नहीं करते दर्द है ऐसा हम पर होंठ बयां नहीं करते करते आंख के आंसू फिर भी वे दया नहीं करते हाले हालात कुछ भी हो ये तस्वीरें हैं जो दर्द के दर्दों पर भी दया नहीं करते कुछ नयन ऐसे से भी जो बवाल नहीं करते* कुछ चाहे हम अगर तुम सुन सको तो कहनाये नयन वो है जो अपनों के दर्दों को बयां करतेइसे कथा, कहानी कहो या कविता सुनाता ह्रदय का व्यथाये दर्दों पर कुछ दवा भी करते हैं, निहारते ये नयन उनकोआभार भी करते यह दर्द की दवा क्या तुमसे हो सकती नहीं संदेह भी नयन को होता यह तुम ही हो या और कोई हाले हालात कुछ भी हो यह तस्वीरें है जो दर्द के दर्द पर भी दया नहीं करते दूरी कितना यह दूर कितना, अपनों से मिलने को तत्परनयनखाने की मार से अच्छा मार ही खालें, मगर यह नयनतरसते अपनों से मिलनेहम कुछ कर नहीं सकते हालात ही कुछ ऐसे हैंहम मजदूर हैं,अभी मजबूर भीबेबसी और लाचारी हां हम मजदूर हैं,अभी मजबूर भीहम चलते रहे यूं ही मंजिल चाहे मिले ना मिलेहम चलते रहे इसी आस पर कीं कोई अपना भी मिले जो साथ चले *कुछ नयन ऐसे भी जो सवाल नहीं करते दर्द है ऐसा हमपर होंठ बयां नहीं करते करते आंख के आंसू फिर भी वे दया नहीं करते हाले हालात कुछ भी हो यह तस्वीरें हैं जो दर्द के दर्द पर भी दया नहीं करते कुछ नयन ऐसे से भी जो बवाल नहीं करते* आंसू यूं ही आ गए मासूम की मासूमियत पर मुझे,रोने को हैनयन तरसता , मासूमियत देख झुक जाते कहीं यह नयन हैंरोने की क्या बात है कहते ही नयनों में नमी और रोते यहनयन हैंहाले हालात कुछ भी हो यह तस्वीरें हैं जो दर्द के दर्दों परभी दया नहीं करते कुछ ऐसे भी नयन खुशी के आंसू बयां करते कुछ नयन नाम से ही नहीं काम से भी उपकार करते तुम्हें तो बस यह दर्द दिखता हमें तो दर्द का अंदर भी तुम ही तो हो वैध जो दर्दों को समझते हो कहीं पर दवा जो करते हो पहुंचता भी हमतक है या नहीं हां तुम ही हो मेरे अपने, हां तुम ही हो मेरे पराए भीकहीं सेवक हो कहीं दर्द के स्वामी भी यह देख होती मुझको है हैरानी भीकुछ यहां करते ऐसा की कर नहीं कोई और सकता यहांमन हृदय भी उनका करता आभार, करता उपकार यहां *दर्द है ऐसा हमपर होंठ बयां नहीं करते करते आंख के आंसू फिर भी वे दया नहीं करते हाले हालात कुछ भी हो यह तस्वीरें हैं जो दर्द के दर्दों पर भी दया नहीं करते*दर्द ऐसे जो छुपाए नहीं छिपते, हालात के आगे झुकतेमगर पैर नहीं रुकतेहाले हालात कुछ भी हो आंखें अंदर के दर्द को बयांनहीं करते, करते भी हो तो सवाल नहीं करतेहार जीत हो जिसका भी यह आंखें हैं दर्द के दर्दों को बयांनहीं करते और करते भी हों तो सवाल नहीं करते *सार में हर हाल में कुछ भी हो हर नयन में तिरंगा रहता है, सार में हर हाल में कुछ भी हो हर दिल में तिरंगा रहता है,हर दिल में तिरंगा रहता है हर नयन में तिरंगा रहता हैहर नयन में आभार रहता है हर नयन को आभार रहता है।* ( जय हिंद जय भारत) *दर्दे दिहाडी़*(अvinashगुupta) -9131773949

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