Human vs Nature along with Corona Virus

कुछ तो सच है कुछ है हउआकैसी मुसीबत क्या है बनउआसुबह से शाम तक डर लगता हैखाना पीना भी अब कम खबता हैकोई ज़िक्र कर दे तेरी corona,तपाक से जी मचला उठता हैदेख रे भारत सुन्न हुए सब,भाई चारे में भी अब डर लगता हैकठिन डगर है और दिन हैं लम्बेउनका अपना-पन अब कम छजता हैFecebook खोलूँ what’s app खोलूँ,… social हो लूँ जब जब मैं,साले Covid19… क़हर तेरा ही अब दिखता हैअम्मा तेरे घर के नुशखे recall हो गये सारे के सारेसोंठ पिंपरी (long pepper) से शहद चाटना या हो पानी में नमक के गरारेबहुअलि की अब बाई ना आई, मैडम की अब देखो कमाईझाड़ू लग गया पोंछा लग गया बर्तन धुल गये सारे के सारेधुत्तराम का कोश तो देखो, सारा हो गया ख़ालीशराब में सोडा गटक छोड़कर ताके balcony की हरियाली ।।अंत कहाँ है अभी घर ठहरो सबसजग रहो संतोष रखो सबसीमित कर दो कदम चाल कोसुनो रे रुको मानो बात कोप्राण पखेरू उड़ जायें रे भैयाऔर हज़ारों संग हो लेंगे बसैयासरकार की तुम बात को समझोमहामारी की तुम चाल को समझो ।।मैं प्रकृति हूँ बोल रही हूँBalancing का खेल.. खेल रही हूँतुमसे पहले मैं थी यहाँ आईभार तुम सबका मैं झेल रही हूँकौन जाति हो तुम सब सुनलोसही क्रमशः अब माला बुनलोरायता फ़ेलाया है तो अब हिसाब तो लुंगीपहले स्वस्थ तो होलूँ फिर माफ़ करूँगीसमय अबधी में तुम सीमित होमैं हूँ, थी, और यहीं रहूँगी।Copyright © Sachin Surya ChaudhariVisit my website: www.socialsurya.com

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