रचनाएं – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

होरीखेलत फाग उमंग लिए मनझूमत तन ठहरी – ठहरीगाल गुलाबी रंग दिए तबडोलत सब गौंआ नगरी।ब्रज की नगरी धूम मचो हैमन मोहन खेलै होरीराधा भागी दौडी – दौड़ीश्यामा करै बलजोरी।मन का बैरी, द्वेष मिटो सबमिलतो सब भाई – भाईझूमत नाचत गावत सब मिलखुशियाँ देतो है लाई।नव वसन तन डारी लियो सबले गुलाल की सब झोरीघर – घर में जातो मिलने कोबचो कहाँ कोई कोरी।जात – पात कौ सीमा मिटतौरहतो है भाईचारोप्रेम सदा दिखतौ है मन मेंलगतो आँखों को तारो।पुआ – पूरी खूब खातो सबघर – घर में सब जाकेरंग, भंग की चढ़ जातो तबहोरी की गीत सुनाके।स्वरचित – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु आप हमसे क्यों, लुटने – लुटाने की बात करते हैख़ामख्वाह दिल से, हमें मिटाने की बात करते हैं।हमनें जो तकल्लुफ़ दिखाये,आपके साथ रहने काआप हैं कि हमें, जग से उठाने की बात करते हैं।कैसे आज कमी रह गई, आपकी तरफदारी मेंसमझे नहीं, नैनों से हटाने की बात करते हैं।रस्म – ए – उल्फ़त में, हमारी कोई खता तो होगी ?नफ़रत कैसी, जो जूल्म ढ़ाने की बात करते हैं।कभी हम, हमसाया बनके रहते थे आपके पासआज आप हमसे किस अफ़साने की बात करते हैं?अफ़सानें की बात, हर वक्त करते हैं सदाक़त मेंआप किस अदब से, हुक्मराने की बात करते हैं?खौफ़-ए-पैगाम का, मलाल अब हमसे मत पूछिएआप गुफ़्तगू में सिर्फ, भड़काने की बात करते हैं।नज़रानासदाक़त की बातें भी होती रहेंगीमुहब्बत की बातें करो धीरे – धीरे।सियासत की बातें, ना करना कभी भीहिफाज़त की बातें, करो धीरे धीरे।हिदायत की बातें, बताना सभी कोसलामत की बातें, करो धीरे – धीरे।कयामत की बातें, ना करना कभी भीइबादत की बातें, करो धीरे – धीरे।शोहरत की बातें, तो होती सदा हैसोहबत की बातें, करो धीरे – धीरे।शहादत की बातें, स्वाभिमान रखतामहारत की बातें, करो धीरे – धीरे।नज़ाकत की बातें, लगे सबको प्यारीशरारत की बातें, करो धीरे – धीरे।अमानत की बातें, तो अपनी जगह हैशराफ़त की बातें, करो धीरे – धीरे।प्रेम ही सत्य हैपता करो तुम कौन होअपने आप से पूछो ?तुमनें यहाँ क्या सीखातेरा वजूद कहाँ है ?क्या लिए और क्या दिएमूल तत्व यहाँ क्या है ?माया ममता लोभ मेंकहीं खो तो नहीं गये।संस्कृति क्या कहती हैसभ्यता से क्या सीखे ?कर्म, कर्तव्य या धर्मकहाँ तलक सार्थक है ?अपने पर विश्वास हैतो हौसला बुलंद कर।एक पहचान बना दोजिंदगी इम्तिहान है।बदन नश्वर होता हैपरमेश्वर अजर अमर।असंख्य रूपों का घरजिसमें जान बसते हैं।जान ही परमात्मा हैआत्मा है तो हम हैं।ये परम तत्व सत्य हैसत्य ही यहाँ प्रेम है।जिंदगी संँवार लो अबजीवन को तार लो अब।मेहनत तो बहुत किएराम को पुकार लो अब।जब काबिलियत साथ होहाथों में जब हाथ हो।तो कौन रोके तुझकोजब इतनी सौगात हो।चोरी – चोरीसजन से गोरी मिलेगी, कबतक चोरी चोरीबोलो कैसे अलग रहे, ये चँदा की चकोरी।इनकी है गजब कहानी, कह सकते नादानीअलग कहाँ रह पायेगी, इतनी प्रेम दिवानी।आँखों को पहले भाया, दिल ने जगह बना लीमेरा मन चंचल इतना, ऐसे उसे मना ली।कम ही मिलते हैं ऐसे, जैसे मजनूँ लैलावो उनके जीवन साथी, सच्चा उनका छैला।ना कोई शंशय मन में, ना कोई बैमानीदिल इतना निर्मल जैसे, बहता गंगा पानी।खुल्लमखुल्ला प्यार करे, भेद न रखते मन मेंऊँची – नीची, जाति – पाति, लोभ न रखते धन में।ऐसा हो जीवन साथी, सुख – दुख में साथ रहेरिश्ता है नाम इसी का, हाथों में हाथ रहे।कायल “बिन्दु” कहे क्या अब, मजबूरी में डूबाकौन यह समझ है पाया, बड़ा है ये अजूबा।ग़ज़ल212 122 122 122रास्ता बदल कर कहाँ जाइयेगाढूंढ लो ठिकाना जहाँ जाइयेगा।गम यहाँ अगर तो वहाँ भी मिलेगाहर जगह तिजारत कहाँ पाइयेगा।भटकना अगर हो जहाँ में कहीं पेसोच लो अभी से जहर खाइयेगा।जिंदगी सँवारो हटाओ बखेड़ाजो मिला तुझे तो खुशी लाइयेगा।गुफ़्तगू नहीं अगर तुम भी करोगेजान लो हमें सब वहाँ छाइयेगा।मांग लो रहम की दुआ हम नसीबासीख लो खुदा से सदा गाइयेगा।बात है पते की कहे “बिन्दु” भाईकर्म ही भरोसा उसे लाइयेगा।कशमकश1क्या जले चराग अब जीस्त ए जान मेंतीरगी – ए – दिल ये कभी जलता नहीं।2तिश्नगी में खाते रहे तरश, देखकरसमंदर आईना दिखाकर चला गया।3गुफ़्तगू-ए- रश्क भला चांँद क्या जानेइश्क – ए – सोहबत चाँदनी क्या जाने।4तीरगी में कबतक छुपेगा आफ़ताबखोले पलकें तो चकाचौंध हो जाता।5ये जुगनु, सितारे सब चमकते रहेंगेखौफ़ का मंजर आते – जाते रहेंगे।6घबराइये नहीं दिलरुबा से कभी भीमजा लूटना है तो नजदीक जाइये।7ये जीना ये मरना लगा ही रहेगाबनेंगी इमारत और फिर वो ढहेगा।कहर कुछ इस तरह ऐसा आकर बरपालोग देखते रहे कारवाँ निकल गया।उसके मैयत पर गये नहीं तो क्या हुआअंधा था बस आँखों से आँसू निकल गया।गंगागंगा इक अविरल धारा हैप्रेम सुधा की जल धाराकितनी पावन कितना निर्मललगता है सबको प्यारा।भागीरथ के तपो भूमि परस्वर्ग से गंगा आईशिव शंकर के दंभ मिटानेजटाओं में लिपट आई।प्रवल वेग देख कुपित हुए थेशिवशंकर प्रलयंकारीभागीरथ के तप के आगेनम हुए थे अंहकारी।कठोर तपस्या का फल उनकाफलित हुआ ये लगता हैधरती पर जिसकी चाहत थीगंगा जल जब बहता है।विष्णु के चरणों की गंगाउनको कितनी प्यारी थीगंगा भी उनके चरणों मेंलगती कितनी न्यारी थी।चैन औ सुख छोड़ के अपनामानव के घर में आई थीदुख दरिद्रता कष्ट मिटाने,इस धरती पर आई थी।जीव – जंतु का हाल बुरा थाहम भी कितने त्रासे थेगंगा जल अमृत से बढ़करकितने प्राणी प्यासे थे।मंगल करनी विपदा हरनीपापों से मुक्त दिलातीभवसागर से पार लगातीबैतरणी हमें दिखाती।स्वार्थ में मानव भूल गयाक्यों माँ गंगा की सूरतमैली गंगा कर दी सबनेपर इनकी बड़ी जरूरत।आओ सब मिल इसे बचाएँकुछ जोखिम सभी उठाएँऐसा संकल्प लें हम सभीउनका ही अब गुण गाएँ।दोकानहम न जननी ई पपिया, हैरान कइले बाहमरे घरवा के आगे, दोकान कइले बा।हम न जननी कि अतना, ई पागल करीहमरे दिलवा के ऐसे, ई घायल करी।अब अखिया के काहे, लोभाए लगलरह रह के ई हमरा, भरमाए लगल।हमरे मनवां के काहे, परेशान कइले बाहमरे घरवा के आगे, दोकान कइले बा।नींद ले गइल चोराके, हम केकरा कहींचैन मिले नाहीं तनिको, अब केतना सहीं।रात करवटे में ऐसे, ही भोर हो गइलधीरे धीरे में सगरे, अब शोर हो गइल।प्यार कैसन बा कि जीअल, मोहाल कइले बाहमरे घरवा के आगे, दोकान कइले बा।याद हमरा सतावेला, अब हम का कहींकोई आके बतावा न, हम कइसे रहीं।हो गइल ई दिल दिवाना , मन पागल भइलनजरियाय से ई गुजरिया, लोभाई गइल।हमारे जीयल ई मुअल, बेहाल कइले बाहमरे घरवा के आगे, दोकान कइले बा।1222 1222 1222ग़ज़लजबर का सिलसिला कब तक चलेगा येसदन का दीप कब तक साथ देगा ये।उजड़ने पर लगा क्यों है हमारा घरकहर, ढ़ाकर हमारा जान लेगा ये।कभी आतंकवादी तो कभी दुश्मनलगे हैं घात में , अंजाम देगा ये।पड़ोसी मुल्क का धोखा कहाँ कम हैपटक कर मार देगा, क्या बचेगा ये।भगा दो अब इसे तुम दूर कोरोनासिखेगा चाइना, मजबूर चेंगा ये।महामारी मचा है, शोर, धीरज रखजगत के हर ठिकाना तक चलेगा ये।न घर से आप निकलो, बात मानो तोसुझावों पर अमल हों, कब करेगा ये।जबर – अत्याचार, जूल्मसदन – घरबिन्देश्वर प्रसाद शर्मा _ (बिन्दु)बाढ़ – पटनाफिरका परस्तीमुझे नहीं मालुम गम क्या खुशी क्याफ़ितरत के आगे ये ज़िंदगी क्या।कभी मुसीबत कभी जश्न -ए- मसर्रतकिसे पता मौत क्या ज़िंदगी क्या।ये साँसें भी शाख पर है टंगीदुआ क्या दवा क्या ये ज़िंदगी क्या।ये दहशत क्या ये चैन-ओ-अमन क्याये हँसना – रोना ये ज़िंदगी क्या।यहाँ कुदरत क्या यहाँ क़यामत क्यावक्त एक आईना ज़िन्दगी क्या।लोग फंसे हैं फिरका परस्ती मेंभूल गये हम क्या ये ज़िन्दगी क्या।किसे पता अच्छाई क्या बुराई क्यासच – झूठ में पलती ये ज़िन्दगी क्या।

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

Leave a Reply