मैं ढूंढ रही किसको ?

मैं ढूंढ रही किसको ?एक स्नेहिल भाव या.एक शीतल छांवकहां से आईं हूँ?कहाँ है जाना मुझे?इस अनसुलझी पहेली ने,जीवनमाला को उलझा सा दिया है।लक्ष्य की ओर बढ़ते-बढ़तेबार-बार पग थम जाते है।शायद मेरा लक्ष्य नही यह,बार-बार.भ्रमित होता है मनमन रागिनी विह्वलता में बदलजाती.हृदय तार की झंकार.वेदना की आह! बन जाती।जो चित्र संजोया था जीवन का.उसके रंग अभी अधूरे हैं।जो रंग भरने थे मुझे उसमेंवो रंग मिले न पूरे हैं।जो रंग मुझे उसमें भरने हैं.वो इंन्द्रधनुष मैं पा न सकी।पर जो है वह सब अच्छा हैये सोच मन को बहलाया हैमैं ढूंढ रही किसको????ये अब तक मुझे समझ न आया है।

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

Leave a Reply