तुम्हारी याद दिल से जाती नहीं (कविता का शीर्षक)

तुम से मिलने की आशा बहुत है मगर,तुम से मिलने कि रुत है कि आती नहीं|करूँ कितनी भी कोशिश दिल बहलाने की मगर,एक तेरी याद दिल से है कि जाती नहीं ||प्रेम कि राह में मुझको ले चली|वो हाथ पकड़ के अपनी गली||मैं तो चलता रहा उसी राह पर मगर,अब मेरे पीछे वो है कि आती नहीं |करूँ कितनी भी कोशिश दिल बहलाने की मगर,एक तेरी याद दिल से है कि जाती नहीं ||साथ चलने की चाहत तुम्हारी ही थी|साथ जीने-मरने की कसमें भी तुम्हारी ही थी||राह तकता हूँ मैं अब तक उसकी मगर,वो है कि इस राह आती नहीं |करूँ कितनी भी कोशिश दिल बहलाने की मगर,एक तेरी याद दिल से है कि जाती नहीं ||क्या हुई थी गलती हमें समझाओ तो|दूर जाने की वजह हमें बतलाओ तो ||हम पूछते रहे उन से मगर, वो है कि कुछ भी बताती नहीं |करूँ कितनी भी कोशिश दिल बहलाने की मगर,एक तेरी याद दिल से है कि जाती नहीं ||-कुलेश्वर जायसवाल (कवि )

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