घर से ना निकल

है पथ कुछ मुश्किल पर तू घर से ना निकल वक्त का इशारा समझ तू खुद से ना उलझ है मौत द्वार पर खड़ी एक अदृश्य मुसीबत बड़ी हार गए जो थे सिकन्दर बच गए,जो थे घर के अंदर 21 दिन की ये मजबूरी रख तू अब दुनिया से दूरी तू एक सैनिक है मान ले तू घर में रहेगा ये ठान ले है वक्त आत्म चिंतन कर ले वैचारिक मन मंथन कर ले ना बन तू स्वयं का कातिल बस तू घर से ना निकल अपनो से मन जाएगा बहलबस तू घर से ना निकल हितेश शर्मा

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