Yatra – Antardwand se Antarman ki

यात्रा – अंतर्द्वंद से अंतर्मन कीशोर, दौड़, आपाधापीद्रुत लय में भागते कंधे,अविरल समूहज़िम्मेदारियों के वजन से बोझिलजोड़, घटाव, गुना, भाग में उलझादिमागी कंप्यूटरपेट के मदरबोर्ड से संचालितद्वंद, प्रतिद्वंद, अंतर्द्वंद केवैचारिक तारों का समूहसुलझता, उलझताएक दूसरे से लिपटताऔर फिरअचानक –सारे ‘शेड्यूल’ और ‘कमिटमेंट’का दम घोंटतासांसों की कड़ियों कोरौंदता, कुचलतातेज़ रफ़्तार से आ धमकावैश्विक पटल परआक्रांतासुदूर वुहान कीअभिशप्त गलियों सेएक नरसंहारी वायरस !बचाव में कैलेंडर की तारीखों ने‘ मास्क ‘ पहन लियाजिसकी आड़ में छिप गयीसारी भीड़तितर बितरइधर उधरअपनी अपनी चारदीवारियों केआयताकार किलों मेंमन मसोसतेपानी की धार मेंहाथों को रगड़लाचारगी बहातेअब ‘ डेली रूटीन ‘ नेनया चोला पहन लिया हैबाहर की चिरपरिचितध्वनियों की परतों से ढकेकदमों नेस्वयं को पूरी तरह‘ सेनेटाईज़ ‘ करकेपहले अल्पविरामऔर फिर पूर्णविराम मेंसमय का संज्ञान लियाचित्त शांत, स्थिरशनैः शनैःहोता स्थितप्रज्ञतब एकांत में शुरू हुईअंतर्मन की यात्राअंतर्द्वंद की सिलवटों कोहौले हौले सहेजतीसुषुप्त जिज्ञासाओं कीअतृप्त क्षुदा शांत करतीसारे संख्या चक्र कोशून्य में समेटतीस्वयं को स्वयं मेंआत्मसात करतीधुंध के परेभीतर, रहस्यों कोतलाशतीअंतर्मन की सात्विक यात्रा…कहीँ प्रकृति द्वाराप्रायोजित तो नहीं ? कवि- विवेक अस्थानासंपर्क- 9867414797

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