यूं होली मनाते – शिशिर मधुकर

तुम पास होते तो तुम को रिझाते गालों पे हर एक रंग को लगाते मुहब्बत को अपनी आगे बढ़ाते तेरे साथ कुछ हम यूं होली मनाते बदलती ऋतु है हुई रात छोटी अंगड़ाई लेती है हर एक बोटी तेरे पास आ के तुझको सताते तेरे साथ हम कुछ यूं होली मनाते तुम बिन अधूरा है जीवन का खेला तनहा कभी भी ना भाता है मेला तुमको ही हाल ए दिल सब सुनाते तेरे साथ हम कुछ यूं होली मनाते जीवन के रंगों को रंगों से रंगना बिना तेरे सूना है घर का ये अंगना तेरी एहमीयत ही तुझको बताते तेरे साथ हम कुछ यूं होली मनाते नशा हो मुहब्बत का या फिर रंगो का आलस तो अंग अंग में आ भरे है बाहों में भर के तुझे बस सुलाते तेरे साथ हम कुछ यूं होली मनाते मुहब्बत है अपनी जैसे हो पूजा साजन सिवा तेरे भाए ना दूजा दुनिया को हंस हंस के ये ही जताते तेरे साथ हम कुछ यूं होली मनाते शिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. DEVESH DIXIT 13/03/2020
    • Shishir "Madhukar" 14/03/2020
  2. vijaykr811 15/03/2020
    • Shishir "Madhukar" 05/04/2020

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