आपदाएँ

आपदाएँ आईं समेट कर ले गईंकुछ सपने कुछ रिश्ते कुछ धड़कनें ले गईंकुछ जमीन के नीचे ले गईंऔर कुछ साथ में बहा के ले गईंसुनामी आई बाड़ आईबादल फटा मुसीबत लाईभूकंप के साथ तबाही आईपृथ्वी बनी गहरी खाईयाद आई सबको माईसैनिक दल ने जान बचाईमंदिर पर कोई आंच न आईआत्मा भी थर्रा उठी भाईसंकट के घनघोर बादल छाएजीवन को मृत्यु के दर्शन कराएजो ईश्वर की भक्ति को पाएऔर जो उनके मन को भाएजीवन के उसने दर्शन पाएऐसी लीला सिर्फ प्रभु दिखाएशक्ति को उनकी हम भाँप न पाएप्रभु हमें उचित राह दिखाएँजिससे भक्ति में ध्यान लगाएँजन जन में हम प्रेम जगाएँदीप से फिर हम दीप जलाएँऔर एक दूजे को गले लगाएँ…………………………………………………………………………………………….देवेश दीक्षित7982437710 

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4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 13/03/2020
    • DEVESH DIXIT 14/03/2020
  2. vijaykr811 18/05/2020
  3. deveshdixit 18/05/2020

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