सबसे ख़ास – शिशिर मधुकर

चलते रहे हैं देख लो मंजिल ना पास है कोई नहीं है जिससे कहें तू सबसे खास है रिश्तों की भीड़ में कोई रिश्ता नहीं मिला कैसे कहूं कि मेरा मन हरदम उदास है बरसे है आग सी मेरे मुंह से वो कह रहा अंगार ही गिरे हैं अगर निकले भड़ास है हर बात पे अदावतें करता रहेगा जो उसके जहन में जान लो रहती खटास है दिल में किसी के क्या छुपा चलता नहीं पता मधुकर सभी ने ओढ़ा यहां नकली लिबास है शिशिर मधुकर

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2 Comments

  1. DEVESH DIXIT 11/03/2020
    • Shishir "Madhukar" 14/03/2020

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