दास्तां – शिशिर मधुकर

जलता रहा हूं उम्र भर तनहा ही आग में कुछ खोट तो जरूर है मेरे चिराग में वो फूल मैंने ए खुदा घर के लिए चुना कोई मिठास है नहीं जिसके पराग में किसको सुनाए दास्तां जीवन की दोस्तों पढ़ लो कहानियां छुपी सीने के दाग में उस घर में देख लो कभी रौनक नहीं मिले कमियां ही ढूंढता है जो अपने सुहाग में वो प्यार क्या लुटाएगा जिसको नहीं पता नफरत भरी है गैर ने उसके दिमाग में शिशिर मधुकर

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2 Comments

  1. deveshdixit DEVESH DIXIT 11/03/2020
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/03/2020

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