CAA की रट्ट

सी ए ए की रट्ट kiran kapur gulati किरन कपूर गुलाटी 12/02/2020 No Commentsसोच अलग हो सकती है।क्या ममता भी खो सकती हैबात अपनी मनवाने कोक्या इनसानियत भी खो सकती हैइक जान जिसको जन्म दियाख़ातिर चन्द सिक्कों केजाने कैसे उसे वार दियागर्म बिरयानी खाने कोमासूम साँसों से हिसाब कियाक्रूर इतना कोई हो सकता हैअपने ही बच्चे कोक्या यूँ ही कोई खो सकता हैइक माँ ने आजमाँ होने का अर्थ ही बदल दियाक़िस्से बहुत सुने थे हमनेभूखी रह कर भी माँबच्चे की जान बचाती हैबिरयानी की ख़ातिर आजबच्चे की जान गँवाती हैसिर शर्म से झुक जाता हैजब एैसी बातें होती हैंममता शर्मसार होती हैआँखें नम हो जाती हैंयह कैसी माँ और कैसी ममताकहाँ गई वो सी ए ए की रट्टकुछ ही समय में सब गया पलटअब पसरी है ख़ामोशी वहाँशाहीनबाग़ में शोर मचायामासूमों से जिहाद करवायामगर दिल को रहम न आयाकरते थे जो सी ए ए का बहानादीवाने सब वो कहाँ गएस्वार्थ जब हो गया पूरासब आँख बचा कर निकल गएइनसानियत को शर्मिन्दा कर गएममता का अर्थ बदल गएसोच अलग हो सकती हैहार जीत के लिये क्याममता भी खो सकती है

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

Leave a Reply