कहते ये लोग हैं – शिशिर मधुकर

उलफत ना तुम तलाश करो कहते ये लोग हैं खुशियों की चाह में यहां मिलते वियोग हैं जड़ से खत्म ना हो सके कोशिश करीं कई दुनिया से पूछ लो इश्क में लगते वो रोग हैं थी चार दिन की चांदनी अब तो है तम घनादिल टूटने के हर तरफ देखो तो सोग हैं हम ढूंढते हैं रूह को वो ही ना मिल सकीउसके बिना मिलन यहां बस नकली भोग हैं ढूंढोगे तुम कहो कहां इक सच्चा हमसफर मधुकर रजा से रब की फकत बनते संजोग हैं शिशिर मधुकर

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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/03/2020
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/03/2020

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