शक्ति – शिशिर मधुकर

शक्ति स्वरूपा है नारी इसके बिना बस कमी है इसका अगर संग ना होगा इंसा की धड़कन थमी है इसके बिना रंग नहीं है हर चीज लगती है फीकी तस्वीर इसकी संवारों अगर धूल उसपे जमी है तनहा ना छोड़ों कभी तुम औरत को देखो जहां में गम फिर फना कैसे होगा जो आंखों में इसकी नमी है हाथों को पकड़ा जो इसने तनहा ना इंसा रहा फिर हर इक जगह धूनी उसकी खुशियों की देखो रमी है बिना प्रेम धागों के कपड़ा जीवन का ना सुन बनेगा मधुकर फकत नारी ही तो धागा असल रेशमी है शिशिर मधुकर

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2 Comments

  1. Yogita Joshi 06/03/2020
    • Shishir "Madhukar" 06/03/2020

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