पत्थर – शिशिर मधुकर

अनोखी हर अदा तेरी तुझे कैसे बताऊं मैं तेरी तस्वीर सीने से बता कैसे हटाऊं मैं भले तू बन गई पत्थर मेरे अब पास ना आए इबारत तेरी यादों की बता कैसे मिटाऊं मैं तुझे मिल जाएंगे साथी जहां में और भी कितने सहारे किस के तनहा ये सफर अपना बिताऊं मैं अरे तू आजमाना चाहती है आजमा लेना मुझे मौक़ा मिले तो जान भी तुझपे लुटाऊं मैं तेरे बिन प्यार मेरा दिल ही दिल में घुट रहा है सुन तुझे पलकों पे मधूकर कह रहा हरदम बिठाऊं मैं शिशिर मधुकर

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2 Comments

  1. vijaykr811 06/03/2020
    • Shishir "Madhukar" 06/03/2020

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