जादूगरी – शिशिर मधुकर

देखो जहां भी नुमाया कुदरत की जादूगरी है हुस्न मेरी जाना तुम्हारा शफ्फाक और मरमरी है यूं ही नहीं रूप तेरा दुनिया को प्यारा लगे सुन अल्लाह की ये तो अनोखी बस देख कारीगरी है हंस हंस के तूने मुझे जो अपने गले से लगाया उमंगों से नस नस मेरी तो आ देख ले बस भरी है पहरे हजारों लगा लो ये जान भी चाहे ले लो उलफत डराने से देखो पर ना कभी भी डरी है तड़पा करे है अगर वो यादों में तेरी हमेशा मधुकर समझ लो मुहब्बत उसकी ये एकदम खरी है शिशिर मधुकर

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