इस बसंत ….

  1. इस बसंत ….इस बसंत न करना कोई फूलों की बातचमन को कोई सुलगा गया है .न गाएंगे भँवरे , न झूमेंगी कलियाँफागुन पर सितम कोई बरसा गया है.जलते हुए मकान , वीरान गलियांईंट पत्थर और टूटे हुए शीशेबिखरी हुई किताबें , घायल अस्पतालहवाओं में जहर कोई घोला गया है .इस बसंत ……थी रजिया की शादी , कहीं पूजा की सगाईसज रही थी मेहँदी , बन रही थी मिठाईसितमगर ने देखो सितम कैसा ढायामानवता को कोई झुलसा गया है .इस बसंतकहाँ हैं वो नेता , अभनेता सभीकरते थे वादे और स्वांग कईपूछो उनसे और जवाब मांगोबस्ती तुम्हारी कोई उजाड़ गया है .इस बसंत न करना कोई फूलों की बातचमन को कोई सुलगा गया हैन जाएंगे भँवरे , न झूमेंगी कलियाँफागुन पर सितम कोई बरसा गया है

–Deepika Sharma

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2 Comments

  1. Dr Deepika Sharma 02/03/2020
  2. vijaykr811 02/03/2020

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