कुछ सवाल ज़िंदगी से ….. (गजल)

यह क्या रोग लगाया है खुद को ए ज़िंदगी !,जिंदगी से कहीं पीछे छुट गयी तू ज़िंदगी ।कितनी हसरतें थी तेरी,और कितनी चाहते ,वो सब तुझसे क्यों रूठ गयी ए ज़िंदगी !यह सारा जहां तो गुलज़ार है बहारों से ,मगर तुझपर ही क्यों खिजा ,ए ज़िंदगी !झिलमिलाती थी हर सु पूरे जोश-खरोश से ,अपने ही अश्क़ों से बुझ गयी यह ज़िंदगी ।खुदा का पता ठिकाना है भी या नहीं ?आखिर किसकी और कैसे करूँ में बंदगी ?गर है वो पर्दानशीन तो कभी सामने तो आए ,फिर ‘अनु ‘ सदका करदे उसपर ये ज़िंदगी । 

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4 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 29/02/2020
  2. Onika Setia Onika Setia 14/04/2020
  3. shrija kumari shrija kumari 15/04/2020
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/04/2020

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