ख्वाब – अस्तित्व में होने की

ख्वाब- अस्तित्व में होने कीरगों में मेरे बहता जुनून था।तभी माथे पर भी,कुछ कर-गुजरने का सुकून था।औकात से कुछ बड़ा करने की चाह थी।आंखों में दिखती लबासना की राह थी।लक्ष्मीकांत और बिपन चन्द्रा के पन्नों में,जगती मेरी रातें थी।निरंतर मस्तिष्क के साथ,कार्यरत मेरी धड़कनें और मेरी सांसे थी।फिर खजूर पेड़ की वो छिछली छांव,आयी मुझे ऐसी रास।भूलाकर बरगद तले आशियाना,होता जा रहा अपने ही विलासिताओं का दास।बदलने एक हस्ताक्षर से अपने,भारत की तस्वीर।जेराॅक्स,प्रिंट आउट और ई-मेल तक ही,सिमट कर रह गई मेरी तकदीर।अपनों से दूर, अपने सपनों से दूर,उन सपनों की जरूरतों से दूर,और उन ज़रूरी कोशिशों से दूर,बस चले जा रहा हूं।थका नहीं,पर ठहरना चाहता हूं।राहों में मेरे कांटे नहीं,हैं बस फूल ही फूल।पर राहें बदलना चाहता हूं।एक बार फिर,उन पथरीली राहों पर,खजूर पेड़ से दूर,बहुत दूर उस बरगद के छांव तले सोना चाहता हूं।हां, हुई थोड़ी देर ही सही,पर पागलों सा कुछ करना चाहता हूं।

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

Leave a Reply