होली के रंग

होली के रंगों में उठे सवालजिससे मच गया बड़ा बवालहैं इनमें गुलाब, गुब्बारे और पिचकारीजो नहीं लगे हमें हितकारीइनके सवालों से तो सांसद भी हुआ फेलएक दूजे पर दोष रहे पेलगुलाब कहे गुब्बारे सेकोई प्रसन्न नहीं तुम्हारे सेजिस पर पड़ती तुम्हारी मारसमझो पक्का गया वो हारबड़ी देर तक वो भाग मलेजिस हिस्से पर आघात लगेकहने को तो खेलें होलीपड़ने से तुम्हारे आँखें रोतींगुब्बारा कहे फिर गुलाब सेन निकलो तुम म्यान सेतुम तो इतने सूखे होफिर क्यों चौड़े होते होतुम्हारा लगना ही इतना घातक हैमुसीबत का खुलता फाटक हैउड़ कर पहुँचते आँखों मेंचौड़े होते सिर्फ बातों मेंपिचकारी सब कुछ सुन रही थीमन ही मन कुछ बुन रही थीउन दोनों की बातें सुन करचल दी वो वहाँ से उठ करउन दोनों ने फिर आवाज़ लगाईकहाँ चल दीं तुम पिचकारी ताईपिचकारी ने फिर तब मुंह खोलाअपने ज्ञान का पिटारा खोलाबोली बड़ी रुयांसी होकरपहले आओ तुम मुंह धोकरएक बात तुमको बताती हूँनए वाइरस से मिलाती हूँकोरोना जिसका नाम हैमृत्यु देना उसका काम हैबना सकते हैं हमें निशानाकर्म नहीं हमारा जीवन मिटानाहमसे तो लोग खुशी मनातेधूम धाम से नाचते गातेक्यों बनें हम दुख का कारणक्यों न करें हम मौन धारणसबको यही बताना हैहमको नहीं सताना हैहुआ अगर कुछ भी तुम लोगों कोचैन न मिलेगा हम रंगों कोसावधान रहोसुरक्षित रहोयही हमारी मनोकामना हैतुम्हारे प्रति शुभकामना है………………………………………………………..देवेश दीक्षित – 7982437710

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4 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/02/2020
    • deveshdixit DEVESH DIXIT 26/02/2020
  2. deveshdixit DEVESH DIXIT 26/02/2020
  3. vijaykr811 vijaykr811 18/05/2020

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