होली के रंग………………….देवेश दीक्षित

होली के रंगों में उठे सवाल

जिससे मच गया बड़ा बवाल

हैं इनमें गुलाब, गुब्बारे और पिचकारी

जो नहीं लगे हमें हितकारी

इनके सवालों से तो सांसद भी हुआ फेल

एक दूजे पर दोष रहे पेल

गुलाब कहे गुब्बारे से

कोई प्रसन्न नहीं तुम्हारे से

जिस पर पड़ती तुम्हारी मार

समझो पक्का गया वो हार

बड़ी देर तक वो भाग मले

जिस हिस्से पर आघात लगे

कहने को तो खेलें होली

पड़ने से तुम्हारे आँखें रोतीं

गुब्बारा कहे फिर गुलाब से

न निकलो तुम म्यान से

तुम तो इतने सूखे हो

फिर क्यों चौड़े होते हो

तुम्हारा लगना ही इतना घातक है

मुसीबत का खुलता फाटक है

उड़ कर पहुँचते आँखों में

चौड़े होते सिर्फ बातों में

पिचकारी सब कुछ सुन रही थी

मन ही मन कुछ बुन रही थी

उन दोनों की बातें सुन कर

चल दी वो वहाँ से उठ कर

उन दोनों ने फिर आवाज़ लगाई

कहाँ चल दीं तुम पिचकारी ताई

पिचकारी ने फिर तब मुंह खोला

अपने ज्ञान का पिटारा खोला

बोली बड़ी रुयांसी होकर

पहले आओ तुम मुंह धोकर

एक बात तुमको बताती हूँ

नए वाइरस से मिलाती हूँ

कोरोना जिसका नाम है

मृत्यु देना उसका काम है

बना सकते हैं हमें निशाना

कर्म नहीं हमारा जीवन मिटाना

हमसे तो लोग खुशी मनाते

धूम धाम से नाचते गाते

क्यों बनें हम दुख का कारण

क्यों न करें हम मौन धारण

सबको यही बताना है

हमको नहीं सताना है

हुआ अगर कुछ भी तुम लोगों को

चैन न मिलेगा हम रंगों को

सावधान रहो

सुरक्षित रहो

यही हमारी मनोकामना है

तुम्हारे प्रति शुभकामना है

………………………………………………………..देवेश दीक्षित – 7982437710

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4 Comments

  1. डी. के. निवातिया 25/02/2020
    • DEVESH DIXIT 26/02/2020
  2. DEVESH DIXIT 26/02/2020
  3. vijaykr811 18/05/2020

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