और कितनी चाहिए तुम्हें आज़ादी ? (कविता)

आज़ादी ! आज़ादी !आज़ादी !,बस रट लगा रखी है ‘आज़ादी ‘।इस लफ्ज की गहराई जानते हो ?आखिर क्या है यह आज़ादी ?ऊंची सोच और विशाल ह्रदय ,सयमित जीवन है ‘आज़ादी ‘।तुम्हारी सोच में स्वार्थ की बू है ,इक घटिया ज़िद है आज़ादी ।अपने फर्ज़ तुम जानते भी हो!वतन से मांगते हो आज़ादी ।वतन के लिए फर्ज़ की अनदेखी ,मगर  चाहिए तुम्हें हक़-ए -आजादी ।राष्ट्रीय संपत्ति की तोड़ -फोड़ ,आगजनी ,दहशतगर्दी ,गुंडागर्दी के लिए आजादी ।सरकार के खिलाफ खुलेआम नारेबाज़ी ,ज़ुबान से जहर उगलने के लिए आजादी ।तुम दे सकते हो प्रधानमंत्री जी तक को गाली ,उन्हें खंजर चुभोने को चाहिए तुम्हें आजादी ।वतन के संविधान ,सभ्यता और संस्कृति को ,अपमानित और मिटाने की चाहिए आजादी ।हमारे देश के दुश्मनों से मिलकर गहरी साजिशें ,साफ तौर पर गद्दारी करने की चाहिए तुम्हें आजादी ।अरे एहसान फरामोशों! इतने गुनाहो के बावजूद भी ,सर उठाकर बेशर्मी से जीने की तुम्हें चाहिए आजादी ।गर इतने ही हो परेशान तो चले जाओ ना यहाँ से ,दूर हो जाओ !अपनी ओकात समझ मे आ जाएगी और समझ मे ,आ जाएगा हर्फ -ए- आजादी ।फिर हम भी देखेंगे ,कैसे और कौन देता है तुम्हेंअपने बेलगाम ख़यालों के साथ बेलगाम जीवनजीने की आज़ादी !!     

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

4 Comments

  1. Sukhmangal Singh sukhmangal singh 06/02/2020
    • Onika Setia Onika Setia 29/02/2020
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 12/02/2020
    • Onika Setia Onika Setia 29/02/2020

Leave a Reply