आशाएं कम रखो – शिशिर मधुकर

गलती करी है तो उसे सहने का दम रखो इस जिंदगी के खेल में आशाएं कम रखो ताली बजी है ना कभी एक हाथ से सुनो सच को झुटलाने का ना मन में वहम रखो खुद को बचाने के लिए मारो ना गैर को आंखों में अपनी हर घड़ी कुछ तो शरम रखो झूठ को लिख कर कभी ऊंचा ना वो बना सच के लिए लड़ती रहे ऐसी कलम रखो तूफां भी आएंगे यहां छूटेंगे हाथ भी मधुकर सभी कुछ सोच तुम आगे कदम रखो शिशिर मधुकर

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11 Comments

  1. deveshdixit 30/01/2020
    • Shishir "Madhukar" 03/02/2020
  2. deveshdixit 30/01/2020
    • hitishere 01/02/2020
      • Shishir "Madhukar" 03/02/2020
  3. kiran kapur gulati 12/02/2020
    • Shishir "Madhukar" 16/02/2020
  4. डी. के. निवातिया 25/02/2020
    • Shishir "Madhukar" 05/03/2020
  5. Yogita Joshi 06/03/2020
    • Shishir "Madhukar" 06/03/2020

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