मुझसे वादा करो

मुझसे वादा करोतुम्हे देख दिल का मचलना है क्यापलकों का खुल खुल के झँपना है क्या।गुम सुम सी चुप तुम हो बैठी मगरकँपकँपा के अधरों का खुलना है क्या। मैं अब तक समझ ही न पाया इसेभावों का पल पल बदलना है क्या। सत्य हो तुम या हो फिर कोई कल्पनाया मंगल अवसर की हो अल्पनान अब चुप रहो, कुछ तो आवाज़ दोमिलने का मुझसे कोई वादा करो। जो बिछड़े अभी फिर मिलेंगे कहांतुम रहोगी कहीं, मैं रहूंगा कहांजो इक प्राण हैं हम दोनों अगरतो बिछड़ करके दोनों रहेंगे कहां। न अब चुप रहो, कुछ तो एहसास दोशीश कांधे पे रख घन का अहसास दोतृप्त हो जाये ये प्यासी धराप्रेमभाव की ऐसी घनसार दो। अगर जो कहीं तुम कोई स्वप्न होतो उस स्वप्न की इक किरण दो मुझेमेरी सृष्टि भी है समर्पित तुम्हेंमेरी पलकों में सजने का वादा करो।। अजय कुमार पाण्डेयहैदराबाद

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