दर्पन – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

जीवन दर्पनपरिंदों को छू लेने दो आकाशउन्हें हौसलों में जी लेने दोफतह कर लेने दोउन्हें उनकी अपनी मंजिल।पहुँच जानें दो चरम तकगतांक के आगे क्या हैसमझ लेने दो उन्हें।पंख जले या कटेउनकी उन्हें परवाह नहींएक विश्वास बस भर जाने दो।संकल्प उनका है तेरा क्यातेरा चिंतन बेकार हैआज जिंदा है, कल मर जायेगाशरीर से आत्मा निकल जायेगी।मिट्टी में मिल जायेगावायु में विलिन हो जायेगीपंच तत्व का सुंदर शरीरप्राकृत में समा जायेगीअस्तित्व ही मिट जायेगान कुछ लाए न कुछ ले जायेगाजिंदा हो, शान से जीओ।झूठ, लालच, ईर्ष्या से दूर रहोसत्य को हमेशा साथ रखोधर्म के रास्ते चलकेसबको प्रकाश में लाओप्रेम की गंगा बहाओ।अपने कर्म को संकल्पित करोकर्म योगी बनोदेखना, महान बन जाओगेआदमी हो, इंसान बन जायेगाअपनी सभ्यता खोने मत दोकिसी को रोने मत दोआदमी हो, भगवान बन जायेगा।संस्कृति को दाव पर मत लगने दोअपनी इज्जत आप बचाओनारी का सम्मान करोईश्वर पर भरोसा रखोकभी दुख कभी सुखसब परिवर्तनशील हैयही संसार हैयही माया नगरीभ्रम का बाजार यही है।रोना – हसनाआता जाता रहेगादुख से मत घबराओसुख को गले लगाओप्रेम करो, धेर्य रखो।मृत्यु निश्चित हैभक्ति में रम जाओशायद उद्धार हो जाए।समय को व्यर्थ मत जाने दोसंकल्प अधूरा मत करोजन हित में प्राण भी जाएतो गम न होदुसरे को कष्ट मत दो।मात पिता गुरु की सेवा करोयही स्वर्ग हैयहीं मुक्ति है। रुख हवाओं का तुम बदलना सीखोवक्त के हिसाबों पर चलना सीखो।कौन जाने तुम कब लड़खड़ा जाओनादान मत बनो सम्भलना सीखो।काबिलियत है उसको उजागर करोदीप हो तुम सिर्फ़ अब जलना सीखो।हर विघ्न चुटकी में सिमट जायेगाबस हूनर से उसे मसलना सीखो।तुम हो वीर सिपाही हिन्दुस्तान केबन रक्षिता दुश्मन को दलना सीखो।इस तिरंगे की कभी शान न झूकेसीना तानकर तुम निकलना सीखो।सादा जीवन, प्रेम, उच्च विचार होहर गुस्से को निगलना सीखो।सरस्वती वंदनामैं अपने प्रतिज्ञान से माता, अवगत तुझे कराता हूँहो समर्पित चरणों में तेरा, अपना शीश झुकाता हूँ।हे महाश्वेता, हंसासना, चित्रगन्धा, तू नैना – भिरामतू स्वरात्मिका, चन्द्रलेखा, विमला, तू विश्वा सुखधाम।मैं बालक नादान हूँ तेरा, तेरा ही गुण गाता हूँहो समर्पित चरणों में तेरा, अपना शीश झुकाता हूँ।तू सौम्या, सर्वदेवस्तुता, तू ही ब्राह्मी – सौदामिनीतू शुभदा, रमा, चन्द्रवदना, तू रूप सौभाग्य दायिनी।नित्य वंदन – अभिनन्दन करने, तेरे दर ही जाता हूँहो समर्पित चरणों में तेरा, अपना शीश झुकाता हूँ।तू अम्बिका, धूम्रलोचनमर्दना, तू सुरासुर नमस्कृतातू कांता, निरञ्जना, वेदऋचा, विद्याधर सुपूजिता।धर्म – कर्म को साथ में लेके, अपनी लाज बचाता हूँहो समर्पित चरणों में तेरा, अपना शीश झुकाता हूँ।विद्या और वाणी की देवी, सुर – ताल तेरी वीणा मेंसभी रहस्य तेरे अंतस में, छुपी है राज त्रिगुणा में।मेरी नैया डगमग जब करती, तुझको में बुलाता हूँहो समर्पित चरणों में तेरा,अपना शीश झुकाता हूँ।दोहेमातृभूमि जय हिन्द की, हम सब हैं संतानसाथ तिरंगा है सदा, आन, बान औ शान।ध्वज तिरंगा दे गया,वीरों की पहचानबलिदानों की भीड़ में, आजादी का गान।सुरक्षाहो सुरक्षा इनकी सदा, देश भक्ति हो साथझुकने न दो कभी इसे, रहे तिरंगा हाथ। हमें समझ में आ गया, बलिदानों की शानरहे तिरंगा यह अमर, हो इनका सम्मान।लेकर झंडा हाथ में, आए बच्चे साथदीवानापन था गजब, होठों पर मुस्कान।आज गणतंत्र हिन्द का , पर्व मनाते लोगकुर्बानी को याद कर, रखते इनके मान।नारा वंदेमातरम् , की करिये जय धोषदिल में रखिये जोश भी, खून रहे ऊफान।करिये सेवा देश की, बनिये पहरेदारइनकी सुरक्षा खुद करें, देकर अपनी जान।

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