खास मेरा है – शिशिर मधुकर

मेरी चिंता जो करता है वो ही बस खास मेरा है वरना दिन रात ढलते हैं रोज होता सवेरा है प्यार की रौशनी देती है बस हरसूं उजाले को छुपी नफ़रत के आलम में अंधेरा ही अंधेरा है वो असली साथिया है किस तरह मालूम हो पाए देख लो दिल में क्या उसके फकत अपना बसेरा है मुझे है जुस्तजू जिसकी वो ही अब पास ना आए बड़ी तनहाइयों ने मुझको आ हर ओर घेरा है महर कुदरत की बरसे है मुहब्बत से भरे घर में खुदा ने नूर मधुकर खुद वहां जा के बिखेरा है शिशिर मधुकर

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